Year: 2020

You will be satisfied to know that the title of a chapter in the use of truth in Gandhiji’s autobiography is Rajnistha

One of the many things that Corona virus has done is that it has also given us a new vision towards the relationship of people and system in democracy. Today there has been a direct dialogue between the government and

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They were thinking of the same mysterious immune system, the nature of which scientific information was later executed.

Immune system … The immune system of man is also the same marvel. He is well taken care of by his weft. When an external element enters the body, it becomes suspicious. He has to run to destroy it. Many

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Surely Coronavirus will not be able to end mankind. We will survive. Our children will live.

Holocaust … In the last five hundred million years, the earth has been destroyed five times! The most widespread of these apocalypses took place some 25.2 million years ago, which is called The Great Dying. In this, 96 percent of

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when this sun of the thirteenth april continues to sink, then I too will be included in your life’s most important place.

Anniversary … There has always been a dimension of self-pity in anniversaries. A shocking feeling. Why are everyone doing like this today – you start thinking in your mind – so many smiles, so many bouquets and concessions, so happy

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When Madhavrao Scindia was contesting against Atalji, he appealed to the people of Gwalior from the platform of Atalji, “You have the shame of the Scindia family.” And Atalji lost the election badly. However, after the death of Rajmata

# Scindia: cycle of history Jyotiraditya Scindia has joined the BJP more than Congressmen when he joined BJP. The grassroots activist speaks at the behest of the high command, Zindabad or Murdabad, but the mental hue in the BJP’s camp

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“तौहीन बाग महज संयोग नही है, बल्कि देश का सौहार्द बिगाड़ने का प्रयोग है”।

फंतासी और साइंस फिक्शन हॉलीवुड में ज्यादातर फिल्मों का निर्माण फंतासी और साई-फाई में होता है। फंतासी और साई-फाई:- वास्तव में फंतासी विज्ञान की तुलना में साहित्य की सबसे पुरानी शैली है। अपने तर्को के साथ जिसमे जनरल सुपर नेचुरल

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खबसूरत खबसूरत सड़क का हाल बेहाल कर रखा है। खोदकर सड़क को रफू करके चलते बनते है।

Ratsasan उर्फ मैं हूँ दंडाधिकारी. तमिलफ़िल्म रिव्यु पियानो की धुन रोमेंटिक या रिवेंज की हो….दोनो ही स्थिति में कातिल बजती है। सुनने वालों को अपने आगोश में कर लेती है। लेखनएंडनिर्देशन- राम कुमार स्टारकास्ट- विष्णु विशाल, अमला पॉल, सारावनन आदि

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बिल्कुल यही सीन असल पर्दे पर सन 2013 में घटित हुआ था। बस उसका स्थान आंध्र न होकर, दिल्ली था

Kपिल , जिसने तौहीन बाग में गोली चलाई थी। वह आपिया कार्यकर्ता है। तो आप के केजरू को “सरफरोश” फ़िल्म का गुलफाम हसन के उदाहरण में समझ सकते है। कित्ती गहरी साजिश है। कल ही मोदी जी ने कहा था

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कला कभी किसी की गुलाम नही रही, अगर किसी ने कैद करने की कोशिश की तो “वीर-ज़ारा” सरीखी फिल्मों के जरिए, लोगो तक पहुँची है। लेकिन समझदार के जरिए।

1997 में “म्युजिकली हिट” फ़िल्म “दिल तो पागल है” देने और लंबा ब्रेक लेने के बाद 2004 में यश चोपड़ा ने वापस निर्देशन कुर्सी पर बैठने का ऐलान कर दिया। कि यश चोपड़ा फिर से 70 एमएम के पर्दे पर

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“अगर फिल्मों में बॉडी बिल्डर हीरो, शर्ट नही उतारेंगे। तो क्या ऑडियंस को पता नही चलेगा। कि भाई की बॉडी है।”

  “अगर टाइगर श्रॉफ इस तरह की फिल्में भविष्य में करता रहा, तो बीड़ू टाइगर का भविष्य नही रहना। वैसे भी देश मे टाइगर्स की कमी है। “सेव टाइगर बीड़ू” अहमद खान क्या फिल्म मेकिंग को कोरियोग्राफी समझता है। जब

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