“अगर फिल्मों में बॉडी बिल्डर हीरो, शर्ट नही उतारेंगे। तो क्या ऑडियंस को पता नही चलेगा। कि भाई की बॉडी है।”

 

“अगर टाइगर श्रॉफ इस तरह की फिल्में भविष्य में करता रहा, तो बीड़ू टाइगर का भविष्य नही रहना। वैसे भी देश मे टाइगर्स की कमी है। “सेव टाइगर बीड़ू”

अहमद खान क्या फिल्म मेकिंग को कोरियोग्राफी समझता है। जब भी फ़िल्म लेकर आता है। औकात से ज्यादा बकचोदी कर जाता है।

इसकी फिल्मों में यूं लगता है। कि हीरो नही लिया है। बल्कि सुपर हीरो को फ़िल्म में कास्ट किया है। एक्शन मार्वल फिल्मों की तरह रखने की कोशिश करता है। पिछली बार हेलीकॉप्टर उड़ा दिया था। इस बार तोप, आतंकी फ़ौज और तोप के बीच हमेशा बागी सीरीज की तरह अकेला टाइगर…..हैट्स ऑफ अहमद खान।

इस बार तो हेलीकॉप्टर एक्शन पिछले से नेक्स्ट लेवल पर पहुँच गया भाई….

टाइगर के पीछे तीन हेलीकॉप्टर गोलियां बरसाते हुए आ रहे है। लेकिन मजाल है। कि एक भी गोली अहमद खान की परमिशन बिन टाइगर को लग जाए।

“अगर फिल्मों में बॉडी बिल्डर हीरो, शर्ट नही उतारेंगे। तो क्या ऑडियंस को पता नही चलेगा। कि भाई की बॉडी है।” भाईजान वाला चूतियापा… टाइगर करने लगा है।

वही सीरिया का आतंक, और इस आतंक में 90s की भाई-भाई के प्यार की कहानी को पिरोया है। श्रद्धा कपूर के किरदार की लेंग्वेज जमी नही।

[फ़िल्म सिंगल स्क्रीन ऑडियंस के लिए जोरदार/धमाकेदार पैसा वसूल पैकेज साबित हो सकता है। बाकी मल्टीप्लेक्स में लौंडे दिमाग घर रखकर, अपने नजदीकी सिनेमाघरों में जाए]

नोट- फ़िल्म में सिर्फ जुगाड़ नजर आ रहा है। इसका कहानी से कोई दूर दूर तक का वास्ता नही रहेगा।

फ़िल्म अच्छी ओपन कर सकती है। बाकी लाइफ टाइम बॉक्स ऑफिस पर 100 करोडी रहेगी।

मेरा बागी 3 फ़िल्म के लिए ट्रेलर रिव्यु ही रहेगा….यही फ़िल्म रिव्यु है। क्योंकि मुझे अहमद खान पर पूर्ण भरोसा है। कि वो मुझे गलत साबित नही होने देंगे। चाहे भविष्य में फिल्में बनाना छोड़ क्यों न दे।

1957 में किशोर दा के अभिनय से सजी फ़िल्म “बेगुनाह” रिलीज हुई। इस फ़िल्म में पहली बार जयकिशन ने 70 एमएम पर्दे पर अपनी उपस्थिति दी थी। उन्होंने पियानो कंपोजर की भूमिका अदा की थी। लेकिन फिल्म के सभी प्रिंट मुंबई हाईकोर्ट ने नष्ट करने के आदेश दिए थे।

दरसअल फ़िल्म रिलीज के बाद पैरामाउंट पिक्चर्स अमेरिका ने फिल्म पर कॉपी करने का आरोप लगाया था। आरोप में कहा गया था कि फिल्म ‘बेगुनाह’ की कहानी 1954 में रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म ‘नॉक ऑन वुड’ से कॉपी की गई है। पैरामाउंट पिक्चर्स ने मुंबई हाईकोर्ट में ये केस जीत लिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में फिल्म के सभी प्रिंट नष्ट करने के लिए कहा था।

शंकर-जयकिशन के फैंस काफी दिनों से इस फ़िल्म के प्रिंट्स तलाश रहे थे। कोर्ट के आदेश और फ़िल्म रिलीज के 60 साल बाद फिल्म की ये रील मिलना आश्चर्यजनक है।

जबरा फैंस के पास अपने फनकार, कलाकार की हर चीज़ उपलब्ध हो जाती है। बस तलाशना पड़ता है।

दुनिया मे फैन होना, अनोखा और मनोरंजक सफर है।

क्योंकि फैंस की कतार से एक कलाकार शिखर लेता है। फैंस कलाकार की कला सफर के हमसफ़र होते है। जो अपने प्यार से कलाकार की राह में रेड कार्पेट बिछाते है।
जिसपर चलकर, वो बुलंदियों को छू पाता है।

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