बिल्कुल यही सीन असल पर्दे पर सन 2013 में घटित हुआ था। बस उसका स्थान आंध्र न होकर, दिल्ली था

Kपिल , जिसने तौहीन बाग में गोली चलाई थी। वह आपिया कार्यकर्ता है। तो आप के केजरू को “सरफरोश” फ़िल्म का गुलफाम हसन के उदाहरण में समझ सकते है।

कित्ती गहरी साजिश है।

कल ही मोदी जी ने कहा था कि “शाहीन बाग संयोग नही है, बल्कि देश का सौहार्द बिगाड़ने का प्रयोग है”। मोदी जी के कुछ वाक्यात, यूं ही नही होते है। बहुत गहन अर्थ वाले रहते है।

मोदी जी देश के प्रधानमंत्री है। तो उन्हें इस बात का इल्म है।

सरफरोश फ़िल्म का गुलफाम हसन सिंगर के मुखोटे में पाकी साजिश को अंजाम दे रहा था। जिसने एसीपी को बस में कर रखा था। आखिर में एसीपी के आंखों से गुलफाम हसन का पर्दा उठा। तो वह हैरान रह गया।

देख लो, इस कांड से केजरू की दिल्ली चुनाव में स्थिति का पता चलता है। जो खुलेआम हिन्दू और शांतिदूत में दंगल करवाना चाहता था। जिससे दिल्ली की कुर्सी पर पकड़ बनी रहे। इसका चेहरा समझो, जो मुखोटे के पीछे छिपा रखा है।

यही केजरू सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर सेना से सबूत माँगता था। इसकी पार्टी के नेता सेना का अपमान करते है, राफेल के लिए रोड़ा अटकाते है। इन लोगों का दिखावा, अब साफ जग जाहिर हो जाना चईये।

8 तारीख में ईवीएम में अपने इरादे जाहिर करना भाइयो..

लो जी,

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तौहीन बाग वाला पहला फायरिंग केस डिकोड कर लिया।

कपिल गुर्जर…..आपिया निकला….

कुछ दिन पहले काफी लोग इसके समर्थन में थे।

हम गोपाल के समय बोले थे कि यह सीन जबर प्लानिंग से क्रिएट किया गया है। अभी वो भी डिकोडिंग स्टैज पर है।

उसका रिजल्ट भी दिल्ली विधानसभा चुनाव रिजल्ट से पहले आ जाना है।

सोच लो दिल्ली वालों, यह केजरूद्दीन कितना हरामी है।

2013 और 2015 चुनावों में खुद ने खूब थप्पड़ खाए थे। लेकिन 2020 में काफी हाई टेक चुनाव लड़ रहा है।
इसलिए थप्पड़ से बढ़कर बुलेट चला दी।

बोलता था। 300 सीट जीतने के लिए, कितने लोंगो की बलि चढ़ाओगे??

अब ये क्या है बे??

नागार्जुन द्वारा अभिनीत साउथ फ़िल्म है।

राघवन लॉरेन्स द्वारा निर्देशित…

“मेरी जंग- वन मैन आर्मी” उर्फ “मास”

फ़िल्म में कॉमेडियन वेणु माधव ने भिखारी का किरदार अदा किया है। जो दारू बाज होता है। बीमारी का बहाना बनाकर एक डॉन को पागल बना, इमोशनली दारू के लिए पैसे ऐंठ लेता है।

डॉन के पैसों पर मस्त मज़े लेता है।

एक बार डॉन उसे पकड़ लेता है। लेकिन भिखारी डॉन के पैरों में लेटकर, वापस इमोशनली ब्लैक मेल कर लेता है। और दारू के लिए पैसे का जुगाड़ हो जाता है। काफी कॉमेडी भरे सीन है।
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बिल्कुल यही सीन असल पर्दे पर सन 2013 में घटित हुआ था। बस उसका स्थान आंध्र न होकर, दिल्ली था।

एक भाई 370 पेज की रिपोर्ट/चार्जशीट लेकर दिल्ली की जनता के बीच गया। इमोशनली दिल्ली की जनता से अपील करी। और दिल्ली की जनता ने उसकी अपील सुनी….

तो इस तरह एके 49 हुआ…

अब इस भाई को दिल्ली की जनता के प्यार से लगा। कि क्यों न देश की जनता को इमोशनल किया जाए।

भाई निकल पड़े देश भ्रमण के लिए।

इससे दिल्ली की जनता खासा नाराज दिखी। दिल्ली में शिखर से शून्य कर दिया।

भाई दर दर, भटके लेकिन जो सोचा था। वह हाथ न आया।

दिल्ली भी हाथ से गई।

भाई कुछ दिन मेडीटेशन में रहे, और अच्छे से सोचकर निश्चय किया। कैसे दिल्ली वासियों को वापस आंटे में लिया जाए। कैसे दिल्ली की जनता को इमोशनल किया जाए। खूब नाक रगड़ी, माफी मांगी। फ्री, के कुछ वादे किए। जनलोकपाल को बैठाने की बाते करी। कसमे खाई…370 पेज भी निकाला। और दिल्ली की जनता वापस इमोशन में बह गई। इस बार सन 2013 से ज्यादा तगड़ा दिया।

अब वापस भाई सन 2020 में सन 2013 और 2015 के मंसूबे लिए जनता के बीच है। लेकिन इस बार काफी गहन नासा वैज्ञानिक भी टीम में शामिल है। हालांकि वो पहले भी थे। परंतु उस समय उनका हुनर/ज्ञान छुपा हुआ था। हाल में ही निकलकर सामने आया है।

अब देखो….दिल्ली की जनता क्या करती है।

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