Category: Movie critic

खबसूरत खबसूरत सड़क का हाल बेहाल कर रखा है। खोदकर सड़क को रफू करके चलते बनते है।

Ratsasan उर्फ मैं हूँ दंडाधिकारी. तमिलफ़िल्म रिव्यु पियानो की धुन रोमेंटिक या रिवेंज की हो….दोनो ही स्थिति में कातिल बजती है। सुनने वालों को अपने आगोश में कर लेती है। लेखनएंडनिर्देशन- राम कुमार स्टारकास्ट- विष्णु विशाल, अमला पॉल, सारावनन आदि

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कला कभी किसी की गुलाम नही रही, अगर किसी ने कैद करने की कोशिश की तो “वीर-ज़ारा” सरीखी फिल्मों के जरिए, लोगो तक पहुँची है। लेकिन समझदार के जरिए।

1997 में “म्युजिकली हिट” फ़िल्म “दिल तो पागल है” देने और लंबा ब्रेक लेने के बाद 2004 में यश चोपड़ा ने वापस निर्देशन कुर्सी पर बैठने का ऐलान कर दिया। कि यश चोपड़ा फिर से 70 एमएम के पर्दे पर

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“अगर फिल्मों में बॉडी बिल्डर हीरो, शर्ट नही उतारेंगे। तो क्या ऑडियंस को पता नही चलेगा। कि भाई की बॉडी है।”

  “अगर टाइगर श्रॉफ इस तरह की फिल्में भविष्य में करता रहा, तो बीड़ू टाइगर का भविष्य नही रहना। वैसे भी देश मे टाइगर्स की कमी है। “सेव टाइगर बीड़ू” अहमद खान क्या फिल्म मेकिंग को कोरियोग्राफी समझता है। जब

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